विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) क्या है, कार्य, अमेरिका क्यों हुआ WHO से बाहर

इस कोरोना वायरस महामारी के दौर में डोनाल्ड ट्रंप ने कांग्रेस को सूचित किया है कि 7 जुलाई 2020 को उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन को अपना अनुमोदन भेज दिया है जो कि अमेरिका का विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)  से अलग होने के लिए है। दोस्तों हम इसके कारण एवं प्रभाव को आगे विस्तार से चर्चा करेंगे। इससे पहले हम जान लेते हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन क्या है उसके कार्य एवं उद्देश्य क्या है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन क्या है (What is World Health Organisation)

W.H.O या विश्व स्वास्थ्य संगठन, संयुक्त राष्ट्र संघ (United Nations) की एक विशेष संस्था है जिसका गठन 7 अप्रैल 1948 को वास्तविक 61 सदस्य राष्ट्रों में से 26 राष्ट्रों द्वारा दिए गए अनुसमर्थन  से की गई थी। 7 अप्रैल को ही विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है। भारत भी इसके प्रारंभिक सदस्यों में शामिल था। इसकी स्थापना विश्व में पब्लिक हेल्थ को लेकर जवाबदेही के लिए की गई थी। इसका मुख्यालय जिनेवा स्विट्जरलैंड में है। WHO के वर्तमान में महानिदेशक टेड्रोस एडहानॉम एवम उप महानिदेशक सौम्या स्वामीनाथन हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन वर्तमान में 194 सदस्य देशों और 6 क्षेत्रीय कार्यालयों के साथ कार्य कर रहा है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के 6 क्षेत्रीय कार्यालय

विश्व स्वास्थ्य संगठन के विश्व में अलग – अलग क्षेत्रीय कार्यालय है यह कार्यालय है इस प्रकार हैं-
  • हरारे (अफ्रीका)
  • कोपेनहेगन (यूरोप)
  • नई दिल्ली (दक्षिणी पूर्वी एशिया)
  • वॉशिंगटन डीसी (अमेरिका)
  • कायरो (पूर्वी मेडिटेरियन)
  • मनीला (पश्चिमी पेसिफिक)

WHO के उद्देश्य (Purpose of WHO)

वर्ष 1948 में डब्ल्यूएचओ की प्रमुख वास्तविक प्राथमिकताओं में मलेरिया, मातृ व शिशु स्वास्थ्य, यौन रोग, ट्यूबरक्लोसिस, पोषण, पर्यावरणीय स्वछता आदि शामिल थे। इनके अलावा भी कुछ अन्य उद्देश्यों को शामिल किया गया है जैसे कि जन स्वास्थ्य कल्याण, मानसिक स्वास्थ्य तथा परजैविक एवं विषाणु जनित बीमारियां। प्रारंभिक उद्देश्य के अतिरिक्त समय के अनुसार कुछ अन्य उद्देश्य और शामिल किये गए-
  • सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करना।
  • गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करना। आवश्यक दवाओं और स्वास्थ्य उत्पादों की पहुंच में सुधार ।
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीतियों में लोगों की भागीदारी का समर्थन।
  • जोखिमों की पहचान करना एवं आपदा प्रबंधन के लिए तैयार रहना।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के कार्य

WHO अपने उद्देश्यों के अनुरूप ही कार्य करता है। इनके कार्यो में शामिल है-
  • स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ करने के लिए सरकारों की सहायता करना।
  • प्रशासन एवं तकनीकी सुविधाओं को स्थापित करना और उनका नियमित संचालन करना।
  • महामारी एवं सांख्यिकी के आँकड़े तैयार करना।
  • बीमारियों को पूरी तरह खत्म करना, पोषण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं कार्य परिस्थितियों में सुधार करना। टीकाकरण, स्वच्छ जल, खाद्य सुरक्षा, शिक्षा, भोजन के लिए नियमित कार्य करना।
  • सामान्य बीमारियों का उपचार एवं दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  • स्वास्थ्य सेवा केंद्र का निर्माण करवाना।
  • इनके अतिरिक्त WHO गरीबी एवं रंगभेद के संबंधित कार्य भी करता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की उपलब्धियां

WHO ने पिछले कुछ दशकों में स्वास्थ्य के क्षेत्र में सराहनीय कार्य किए हैं। पोलियो टीकाकरण अभियान इसकी प्रमुख उपलब्धियों में एक रहा है। पोलियो पूरे विश्व में दो से तीन देशों को छोड़कर काबू में लाया जा चुका है। एड्स जैसी गंभीर बीमारी की जागरूकता के लिए भी डब्ल्यूएचओ ने निरंतर प्रयास किए हैं। परिवार नियोजन, टीकाकरण को लेकर जागरूकता अभियान चलाए है। ब्राजील में मार्च 2017 में येलो फीवर को काबू में लाना, यमन संकट में भी 5 मिलियन बच्चों को वैक्सीन देना, नाइजीरिया कैंपेन आदि अतुलनीय कार्य रहे हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन और भारत

भारत WHO का सदस्य 12 जनवरी 1948 को बना। दक्षिणी पूर्वी एशिया का क्षेत्रीय कार्यालय भी नई दिल्ली में स्थित है। 1988 में भारत ने WHO के साथ मिलकर पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम शुरू किया और सतत प्रयासों से भारत को 2014 में पोलियो ग्रस्त देशों से बाहर आने में सक्षम हुआ। 1967 में चेचक के पूरे विश्व के अकेले भारत में  65% मामले थे। भारत ने WHO की सहभागिता से चेचक उन्मूलन कार्यक्रम का संचालन किया इसके फलस्वरूप 1977 में भारत को चेचक मुक्त घोषित कर दिया गया।
America-out-WHO, what-world-health-org
America Opt out from WHO

 

अमेरिका का WHO से बाहर होना

USA के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र को पत्र लिखकर WHO से बाहर होने का फैसला किया है। WHO से बाहर होने के लिए किसी भी सदस्य राष्ट्र को 1 वर्ष का पूर्व नोटिस देना होता है। इस प्रकार अमेरिका 6 जुलाई 2021 तक विश्व स्वास्थ्य संगठन से पूरी तरह बाहर हो जाएगा। इससे पहले अप्रैल 2020 में भी ट्रंप ने WHO को फंडिंग नहीं करने की मंशा जाहिर की थी।

अमेरिका के WHO से बाहर होने के कारण

डोनाल्ड ट्रंप ने WHO की वर्तमान भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं। ट्रंप ने WHO के ऊपर आरोप लगाया है कि जब कोरोना वायरस चीन में भीषण रूप धारण कर चुका था तब जनवरी 2020 में चीन और WHO की मीटिंग के बाद भी WHO ने इस भयंकर वायरस से विश्व को आगाह नहीं किया, नहीं कोई विशेष दिशानिर्देश दिए। इस मीटिंग में चीन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन को अनुदान देने की बात भी कही। इस प्रकार WHO द्वारा चीन का पक्ष लेने को लेकर अमेरिका नाराज है।

दोस्तों मेरी राय के अनुसार ट्रंप ने द्वारा यह दांव अमेरिका में होने वाले नवंबर 2020 के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर भी किया जा सकता है। ट्रंप अमेरिका वासियों में एन्टी चीन का एजेंडा बनाकर अपनी स्थिति को मजबूत करना चाहते हैं, क्योंकि अभी कुछ समय से लेकर अमेरिका-चीन के रिश्तो में कोरोना वायरस, व्यापार को लेकर तनातनी की वजह से तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। अगर ट्रम्प  दोबारा सत्ता में लौटते हैं तो शायद वह अपना फैसला वापस भी ले ले। इस तरह अमेरिका की की स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

अमेरिका के बाहर होने से WHO पर असर

संयुक्त राज्य अमेरिका लगभग हर साल WHO को 400 मिलियन डॉलर का डोनेशन देता है जो कि WHO की कुल फंडिंग का लगभग 15% है। यह चीन के फंडिंग से लगभग 10 गुना है। लेकिन अमेरिका के बाहर होने से शायद चीन अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए अपना अनुदान बढ़ा सकता हैं। इसके अलावा भी विश्व स्वास्थ्य संगठन को अपने उद्देश्यों को लेकर अमेरिका की सहायता न मिलने से झटका लग सकता है।

क्या अमेरिका का फैसला सही है

विश्व स्वास्थ्य संगठन से अमेरिका का बाहर होना एक वैश्विक झटके के जैसा माना जा सकता है। अभी कुछ समय से अमेरिका अंतरराष्ट्रीय संगठनों से दूरी बना रहा है

इससे पहले 2017 में अमेरिका यूनेस्को से भी अलग हो चुका है। इसका साफ मतलब है कि अमेरिका अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों से दूर भाग रहा है। अगर अमेरिका डब्ल्यूएचओ से बाहर होता है तो चीन की  स्थिति WHO पर ओर मजबूत होगी। अमेरिका जैसे राष्ट्र को यहां एक लीडरशिप दिखाने की जरूरत थी अगर उसे लगता है कि चीन वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के लिए जिम्मेदार है तो उसे विश्व स्वास्थ्य संगठन के अंदर रहकर समाधान ढूंढने चाहिए थे। उसके बाहर होकर अमेरिका कुछ नहीं करने की स्थिति में होगा। WHO को भी इसके लिए कहीं ना कहीं जिम्मेदार माना जा सकता है वह पिछले कुछ दशकों से H1B1, इन्फ्लूएंजा, बर्ड फ्लू और अब कोरोना वायरस जैसी विकट समस्याओं से निपटने में नाकाम रहा है।

अब आगे क्या

भारत जो वर्तमान में विश्व स्वास्थ्य संगठन का एग्जीक्यूटिव बोर्ड का मेंबर है उसे इस मामले में आगे आना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन में चीन की भूमिका की जांच भी की जा सकती है। अगर वास्तव में WHO और चीन में सांठगांठ हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। जिससे इतने बुरे हालात ना पैदा हो कि किसी राष्ट्र को संगठन से बाहर होना पड़ जाए।

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