भारत के प्रधानमंत्री (All Prime Ministers of India)

एक लोकतांत्रिक देश के लिए आवश्यक है कि उस देश का प्रतिनिधित्व जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि हो। ऐसा ही एक महत्वपूर्ण पद है भारत के प्रधानमंत्री। दोस्तों आज मैं आपको बताऊंगा स्वतंत्रता प्राप्ति से लेकर आज तक के भारत के सभी प्रधानमंत्री के नाम और कार्यकाल ,परिचय, उनके द्वारा किए गए महत्वपूर्ण कार्य तो आइए देखते है।

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भारत के प्रधानमंत्री-

पंडित जवाहरलाल नेहरू

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Jawahar Lal Nehru

इनके पिता अग्रणी स्वतंत्रता सेनानी मोतीलाल नेहरू थे। पंडित नेहरू की पत्नी कमला नेहरू थी जिससे इंदिरा गांधी का जन्म हुआ था। बच्चों में वह चाचा नेहरू के नाम से भी जाने जाते हैं। 1947 में भारत में कांग्रेस में मतदान हुआ मतदान में सर्वाधिक मत सरदार पटेल को मिले। इसके बाद में आचार्य कृपलानी को मिले परंतु गांधी जी के दिशा निर्देश अनुसार इन दोनों ने अपना नाम वापस ले लिया। इस प्रकार नेहरू जी भारत के पहले प्रधानमंत्री बने।

नेहरू जी ने स्वतंत्रता प्राप्ति पश्चात सरदार पटेल के साथ मिलकर उत्पन्न परिस्थितियों को संभाला। नेहरू जी ने प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और सामाजिक नीतियों में आमूलचूल परिवर्तन किए। उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और भारतीय परमाणु ऊर्जा आयोग (AEC) की नींव रखी। देश की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए भारत को आधुनिक रक्षा उपकरणों एवं रक्षा विधियों से लैस करने का प्रयास किया। इन्होंने देश में पंचवर्षीय योजनाओं का शुभारंभ भी किया पर इन सबके बावजूद नेहरू पर चीन की मंशा न जान पाने के भी आरोप है जिसके फलस्वरूप भारत चीन युद्ध 1962 हुआ।

अपने पूरे कार्यकाल के दौरान नेहरू जी कभी भी कश्मीर की समस्या का निपटारा नहीं कर पाए। समस्त राजनीतिक विवाद होने के परे वह एक उत्तम लेखक भी थे। उन्होंने “भारत की खोज” (Discovery of India), स्वयं की आत्मकथा “मेरी कहानी” जैसी कृतियों की रचना की। नेहरू जी को 1955 में भारत रत्न से भी नवाजा गया। उनका कार्यकाल 5 अगस्त 1947 से 27 मई 1964 तक चला जो कि भारत के अब तक सबसे लंबे समय तक रहने वाले प्रधानमंत्री के रूप में दर्ज है। 27 मई को 1964 को हार्ट अटैक से नेहरू जी की मृत्यु हो गई, उनकी समाधि दिल्ली में शांतिवन के नाम से स्थित है।

लाल बहादुर शास्त्री

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                                                                                      Lal bahadur Shastri

इनका जन्म मुगलसराय यूपी में 1904 में मुंशी शारदा प्रसाद यादव के हुआ था। 1964 में पंडित नेहरू की मृत्यु के पश्चात प्रधानमंत्री बने। इस दौरान गुलजारी लाल नंदा को 9 जून 1964 तक प्रधानमंत्री बनाया गया। इस प्रकार शास्त्री जी भारत के दूसरे प्रधानमंत्री बने।

प्रधानमंत्री बनने के दूसरे वर्ष 1965 में ही भारत को पाकिस्तान का आक्रमण झेलना पड़ा। छोटी सी कद काठी शांत एवं साफ-सथरी छवि वाले शास्त्री जी ने पाकिस्तान को करारा जवाब दिया। शास्त्री जी के नारे “जय जवान जय किसान” ने देश में एक नया जोश पैदा किया। युद्ध में भारत की विजय हुई परंतु जनवरी 1966 को सोवियत रूस में पाकिस्तान से वार्ता के लिए ताशकंद में एक सम्मेलन बुलाया गया। उसमें पाकिस्तान की तरफ से आयुब खान ने हिस्सा लिया था।

इस समझौते के अनुसार भारत एवं पाकिस्तान युद्ध पूर्व की स्थिति में आने को तैयार हो गए लेकिन समझौते के पश्चात 11 जनवरी 1966 को रात को लाल बहादुर शास्त्री की रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई। मौत का कारण हार्ट अटैक बताया गया बाद में उनकी पत्नी ललिता शास्त्री ने भी उनकी मौत के ऊपर सवाल उठाए। कुलदीप नैयर जो उस रात को लाल बहादुर शास्त्री के साथ थे उन्होंने उसका पूरा विवरण अपनी पुस्तक में किया है। दोस्तों आज भी लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु का रहस्य वैसा ही है जैसा सुभाष चंद्र बोस का रहा है।

गुलजारी लाल नंदा

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Gulzari Lal Nanda

यह 1964 एवं 1966 में दो बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में रहे जब कांग्रेस अपने उम्मीदवार का चयन नहीं कर पाई।

इंदिरा गांधी

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Indira Gandhi

शास्त्री जी की मृत्यु के पश्चात कांग्रेस में मोरारजी देसाई एवं इंदिरा गांधी के बीच टक्कर थी। अंत में इंदिरा गांधी ने  कांग्रेसी नेताओ के समर्थन से 24 जनवरी 1966 को भारत के तीसरे प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। 1969 में मोरारजी देसाई से कई मुद्दों को लेकर असहमति होने की वजह से कांग्रेस का विभाजन हो गया। जुलाई 1969 में बैंकों का राष्ट्रीयकरण कर इंदिरा गांधी ने बैंकिंग क्षेत्र को एक नयी दिशा दी इंदिरा गांधी ने गरीबी हटाओ अभियान चलाया और 1967 में हरित क्रांति को लेकर आई ।

1971 में वर्तमान बांग्लादेश जो पहले पूर्वी पाकिस्तान के नाम से जाना जाता था, पाकिस्तान की सेना वहां की जनता पर अत्याचार कर रही थी। इससे पूर्व पाकिस्तान के लोग सीमा से लगे भारतीय राज्यों में घुसकर अशांति का माहौल बना दिया। भारत के कहने पर भी यूनाइटेड स्टेट जब बीच में नहीं आया तो भारत ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस स्थिति में युद्ध टाला नहीं जा सकेगा। उस युद्ध में इंदिरा गांधी ने अपना एक नया रूप दिखाया और एक उग्र प्रधानमंत्री की भूमिका निभाई।  अटल बिहारी वाजपेयी  ने इंदिरा गांधी को इस वजह से “चंडी” की उपाधि दी। इस युद्ध में भारत ने पाकिस्तान के 93000 सैनिकों को सरेंडर करने के लिए मजबूर कर दिया और पूर्वी पाकिस्तान को स्वतंत्रता दिला कर स्वतंत्र राष्ट्र घोषित किया। 1972 में भारत -पाकिस्तान के बीच शिमला समझौता हुआ।

लेकिन दोस्तों 1971 की सफलता के बाद 25 जून 1975 की आधी रात को लगाए गए आपातकाल ने इंदिरा गाँधी के कैरियर की दिशा मोड़ दी। 1977 में चुनाव में जनता ने इंदिरा गांधी से मुंह मोड़ लिया। लेकिन जनवरी 1980 को इंदिरा गाँधी वापस सत्ता में आ गई। ऑपरेशन ब्लू स्टार जिसमें स्वर्ण मंदिर में उपस्थित आतंकवादियों का सफाया करने के लिए सेना के प्रवेश को अनुमति दी गई। इससे आक्रोशित होकर कुछ लोगो ने उनके खिलाफ साजिश रची और 31 अक्टूबर 1984 को उनके निवास पर उन्हीं के गार्डो द्वारा उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। भारत ने इस तरह एक जुनूनी नेता को खो दिया।

मोरारजी देसाई

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Morarji Desai

1975 में लगाए गए आपातकाल के बाद भारतीय जनता में भारी आक्रोश था। इसी आक्रोश के कारण 1977 में पांच विपक्षी दलों के गठबंधन ने विजय हासिल की। देश में पहली बार जनता दल के नेतृत्व में नॉन कांग्रेसी सरकार बनी। 23 मार्च 1977 को मोरारजी देसाई ने 81 वर्ष की उम्र में कार्यभार संभाला और भारत के चौथे प्रधानमंत्री बने। आपातकाल में किये गए 42 वें संविधान संशोधन को रद्द कर दिया गया एवं ऐतिहासिक 44 वां संविधान संशोधन किया गया।

दोस्तों शायद आपको यह बात मालूम ना होगी कि मोदी जी के द्वारा किया गया नोटबंदी कोई पहली नोटबंदी नहीं थी इससे पहले 1978 में मोरारजी देसाई ने भी 1000, 5000, और 10,000 के नोटों को बंद कर दिया था। मोरारजी देसाई जैसा प्रखर नेता अपनी पार्टी के महत्वकांक्षी नेताओं चरण सिंह एवं अटल बिहारी के बीच दब कर रह गया अंत में मोरारजी देसाई ने 28 जुलाई 1979 को पद त्याग कर राजनीति से संयास ले लिया।

चौधरी चरण सिंह

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Chodhary Charan Singh

इंदिरा गांधी द्वारा चरण सिंह को जनता दल से विच्छेद कर अपनी पार्टी बनाने को उकसाया गया। चौधरी चरण सिंह ने जनता दल पार्टी से विद्रोह कर कांग्रेस के समर्थन से 28 जुलाई 1979 को अपनी सरकार बनाई। इस प्रकार पहले किसान नेता के तौर पर वह प्रधानमंत्री की कुर्सी पर विराजमान हुए। यह ऐसे प्रधानमंत्री रहे जिन्हें कभी संसद में बोलने का मौका ही नहीं मिला। आखिरकार कांग्रेस के अपने समर्थन वापस लेने की वजह से उन्होंने संसद में बहुमत साबित करने से एक दिन पहले ही अपना त्यागपत्र दे दिया।

राजीव गांधी

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Rajiv Gandhi

राजीव गांधी की मां इंदिरा गांधी की हत्या होने वाली शाम को ही राजीव गांधी को भारत के छठे प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त कर दिया गया। इस समय कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रणब मुखर्जी भी दावेदार थे परन्तु राजीव गाँधी को चुना गया। राजीव गाँधी 40 साल की उम्र में ही भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने। राजीव गांधी की पत्नी का नाम सोनिया गांधी है।  राजीव गांधी ने पायलट की नौकरी छोड़कर राजनीति में प्रवेश किया था। उनकी मां के समय के पंजाब में चल रहे सिखों के विवाद में उन्होंने पंजाब समझौता किया और बाद में उन्हें असम समझौता भी करना पड़ा।

राजीव गांधी ने मतदान की उम्र 18 वर्ष कर दी और दक्षेश संगठन की स्थापना का श्रेय भी उन्हें जाता है । राजीव गांधी को भारत में सूचना क्रांति का जनक माना जाता है।  राजीव गांधी बोफोर्स घोटाले के मामले में भी चर्चित रहे। राजीव गांधी ने श्रीलंका में चल रहे लिट्टे  संगठन (Liberation Tigers of Tamil elam)  के खिलाफ भारतीय सेना भेजी थी । इसी वजह से संगठन के कुछ लोग जो राजीव गाँधी से घृणा से भर चुके थे। 21 मई 1991 को जब चुनाव का दौर चल रहा था तब उन्होंने राजीव गाँधी की निर्मम हत्या करवा दी। राजीव गांधी एक सज्जन एवं प्रगतिशील व्यक्ति थे लेकिन राजनीति में उनके कम अनुभव ने उन्हें परेशान किया।

विश्वनाथ प्रताप सिंह

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VP Singh

विश्वनाथ प्रताप सिंह ने जनता दल के प्रतिनिधि के रूप में 2 दिसंबर 1989 को भारत के सातवें प्रधानमंत्री की शपथ ली।  विश्वनाथ प्रताप सिंह ने मंडल कमीशन की सिफारिशों को लागू  कर दिया और इसके अनुसार अन्य पिछड़ा वर्ग को 27% आरक्षण का प्रावधान किया गया। वी पी सिंह ने अपने कार्यकाल के दौरान धीरूभाई अंबानी और अमिताभ बच्चन जैसी हस्तियों के यहां रेड डाली।  मंडल कमीशन की सिफारिशें लागू करने के पश्चात देश में एक समुदाय उनके खिलाफ हो गया इसके साथ ही उनका पतन भी शुरू हो गया और अंत में 1 वर्ष से भी कम कार्यकाल में ही उन्हें 10 नवंबर 1990 को इस्तीफा देना पड़ा।

चंद्र शेखर

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Chandra Shekhar

चंद्रशेखर जिनकी वी पी सिंह के साथ कभी नहीं बनी कांग्रेस के समर्थन से 10 नवंबर 1990 को भारत के आठवें प्रधानमंत्री बने। कुछ समय पश्चात ही कांग्रेस ने अपना समर्थन जनता दल पार्टी से वापस ले लिया। 5 मार्च 1991 आखिरकार देश में नए लोकसभा चुनाव का ऐलान हुआ। चंद्रशेखर 21 जून 1991 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे।

पी वी नरसिम्हा राव

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PV Narasimha Rao

दोस्तों पीवी नरसिम्हा राव के प्रधानमंत्री बनने की कहानी बड़ी रोचक है। 1991 के चुनाव में कांग्रेस ने पीवी नरसिम्हा राव को टिकट ही नहीं दिया था तो उन्होंने राजनीति से अलविदा करने का फैसला कर लिया था। उसी समय राजीव गांधी की हत्या हो गई और कांग्रेस को नरसिम्हा राव को एक कामचलाऊ प्रधानमंत्री के तौर पर गद्दी पर बैठाना पड़ा।

नरसिम्हा राव देश की कठिन परिस्थितियों में प्रधानमंत्री बने थे उस समय भारत के विदेशी रिजर्व लगभग समाप्त हो गए थे। उससे निपटने के लिए प्रधानमंत्री ने अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह को वित्त मंत्री बनाया।  मनमोहन सिंह के नेतृत्व में भारत ने 1991 के इकोनामिक रिफॉर्म्स किए और स्थिति में सुधार किया। उन्होंने उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की नीतियों को लागू किया। 1992 में सेबी की स्थापना भी की गई।1992 में नरसिम्हा राव के काल में ही बाबरी मस्जिद गिराई गई थी। पीवी नरसिम्हा राव को अपनी चतुराई के लिए भारतीय राजनीति का चाणक्य जाता है। इन्होंने अपने 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा किया।

अटल बिहारी वाजपेयी

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Atal Bihari Vajpayee

11वीं लोकसभा चुनाव में अटल बिहारी वाजपेयी  प्रधानमंत्री के पद के तौर पर उभरे और 16 मई 1996 को शपथ ग्रहण की। लेकिन अटल जी अपना बहुमत साबित नहीं कर पाए और उनका पहला टर्म मात्र 16 दिन ही चला। इस बीच 1996 और 1998 की सरकार गिरने की वजह से 1998 में लोकसभा चुनाव हुए।  इस बार भी बीजेपी सत्ता में आई और फिर से अटल बिहारी वाजपेयी  ने 19 मार्च 1998 को पद संभाला। इस दौरान मई 1998 में भारत ने अपने पांच अंडर ग्राउंड न्यूक्लियर टेस्ट भी पोकरण राजस्थान में संपन्न किये।

इस दौरान अटल जी ने राजनीतिक शांति के लिए पाकिस्तान से लाहौर सम्मेलन किया। लेकिन फिर अटल जी की राजनीति में नया दौर आया और AIADMK ने मई 1999 में अपना समर्थन बीजेपी से वापस ले लिया इसी समय पाकिस्तान के साथ कारगिल युद्ध भी हुआ युद्ध में भारत को काफी नुकसान हुआ पर आखिरकार विजय भारत की हुई। युद्ध के पश्चात बाद 1999 में वापस चुनाव हुए और इस बार भी बीजेपी 543 में से 303 सीटों के साथ सत्ता में आई।  13 अक्टूबर 1999 को अटल जी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री की शपथ ग्रहण की।

दोस्तों दिसंबर 1999 में ही काठमांडू से दिल्ली वाली इंडियन एयरलाइंस को हाईजैक कर लिया गया था। यात्रियों के बदले भारत को कई मांगे माननी पड़ी और बदले में मसूद अजहर को भी रिहा करना पड़ा। 13 दिसंबर 2001 को कुछ पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा भारतीय संसद पर किया गया हमला भी भारत की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला था। 2002 में अटल जी ने आतंकवाद निवारण एक्ट पास किया। 2002 में ही गुजरात दंगे भी अटल जी के कार्यकाल में हुए। अटल जी एक ऐसा व्यक्तित्व थे जो सरलता सादगी से भरे थे उन्होंने अपने कई महत्वपूर्ण फैसलों से भारत को एक नई राह की ओर अग्रसर किया।

एच डी देवगौड़ा

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HD Deve Gowda

1996  मे अटल बिहारी वाजपेयी  के प्रधानमंत्री के पद से हटने के बाद एच डी देवगौड़ा को तीसरा मोर्चा (United Forum ) से आनन फानन में प्रधानमंत्री बनाया गया। इस समय वे कर्नाटक के मुख्यमंत्री थे। सीताराम केसरी के कांग्रेस अध्यक्ष बनते ही देवगौड़ा सरकार से समर्थन वापस ले लिया गया। 21 अप्रैल 1997 देवगौड़ा को अपना इस्तीफा देना पड़ा। शांत और कर्मठ नेता एच डी देवगौड़ा को मात्र 9 महीने पद पर बैठा कर समर्थन वापस लेना उनके साथ बड़ा अन्याय करने जैसा था।

इंद्र कुमार गुजराल

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                                                                                        Inder Kumar Gujral

सीताराम केसरी ने कांग्रेस अध्यक्ष  बनने के बाद बाकी पार्टियों की मदद से खुद को प्रधानमंत्री बनाने का प्रयत्न किया। लेकिन अन्य दलों  की सहमति प्राप्त नहीं हुई ।मुलायम सिंह भी प्रधानमंत्री बनने का प्रयास कर रहे थे इस बीच इंद्र कुमार गुजराल को प्रधानमंत्री बनाने का फैसला किया गया। इन्द्र कुमार सर्व सहमति से 21 अप्रैल 1997 को प्रधानमंत्री नियुक्त हुए।

दोस्तों भारत की राजनीति में मई 1996 से मार्च 1998 तक काफी उथल पुथल देखने को मिली। इस दौरान किसी पार्टी को बहुमत न होने की वजह से बार-बार पीएम के चेहरे बदलने पड़े। इंद्र कुमार के ऊपर लालू प्रसाद यादव को चारे घोटाले से बचाने का आरोप भी  है। जब लालू प्रसाद का जेल जाना निश्चित था तभी इंद्र कुमार ने CBI निदेशक को उसके पद से हटा दिया। इंद्र कुमार उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन को लेकर भी विवादों में रहे।  कांग्रेस ने हमेशा की तरह इस बार भी अपना समर्थन खींच लिया, इस प्रकार गुजराल 14 मार्च 1998 तक ही प्रधानमंत्री रह पाए।

मनमोहन सिंह

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Manmohan Singh

2004 में 14 वी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को बहुमत मिला पहले सोनिया गांधी प्रधानमंत्री पद के दावेदार थी। परंतु अचानक से मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री का पद दे दिया गया। मनमोहन सिंह ने 22 मई 2004 को भारत के 13वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने लेकिन कभी भी स्वतंत्र रूप से कार्य न कर सके।  

2007 में इनके कार्यकाल में भारत ने 9 परसेंट की जीडीपी ग्रोथ हासिल कर विश्व में दूसरी सबसे तेज बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था का खिताब हासिल किया। नरेगा और RTI  एक्ट 2005 में ही पास किए गए थे। मनमोहन सिंह ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू किया जिसमे 6 वर्ष से लेकर 14 वर्ष तक के बच्चो के लिए अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान किया गया था। 15वीं लोकसभा चुनाव में भी मनमोहन सिंह ही प्रधानमंत्री बने। लेकिन ये दूसरा कार्यकाल उनके लिए ज्यादा सफल नहीं रहा। कुछ भी हो लेकिन जो कार्य मनमोहन सिंह ने 1991 में भारतीय अर्थव्यवस्था को सुधार करने के लिए किये है। वो हमेशा इसके लिए याद किये जायेंगे।

नरेंद्र मोदी

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Narendra Modi

भारत के 14 प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को प्रधानमंत्री की शपथ ग्रहण की। इससे पहले वह कई वर्षों तक गुजरात के सीएम रहे। वे पहले ऐसे गैर-कांग्रेसी प्रधानमन्त्री हैं, जो कि पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता पर विद्यमान हुए हैं, साथ ही वे पहले ऐसे प्रधानमन्त्री हैं, जो कि आज़ाद भारत में जन्मे हैं। नरेंद्र मोदी ने अपने प्रारंभिक काल में योजना आयोग को निरस्त कर नीति आयोग का गठन किया।

इनके ही कार्यकाल में उन्होंने उज्जवला योजना का शुभारंभ किया, तीन तलाक बिल, नोटबंदी आदि कई महत्वपूर्ण फैसले किए गए। अपने दूसरे कार्यकाल में इन्होंने जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटा दी। जो आज तक का एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक फैसला रहा। राम मंदिर का निपटरा भी इन्ही के काल में हुआ। 2016 में पाकिस्तान के ऊपर सर्जिकल स्ट्राइक कर के मोदी जी ने बता दिया की जो कोई भारत की तरफ आँख उठाकर देखेगा भारत उसका मुँह तोड़ जवाब देगा। इनके कार्यकाल में भारत ने कई नई बुलंदियों को हासिल किया। वहीं कुछ नाकामियां भी सामने उभर कर आई जैसे कि बेरोजगारी पिछले 45 साल में चरम पर पहुंच जाना, जीडीपी में गिरावट होना, पड़ोसी देशों से खराब रिश्ते आदि।  इन सबके बीच में अभी उनका प्रधानमंत्री के तौर पर दूसरा टर्म चल रहा है

तो दोस्तों कैसा लगा ये आर्टिकल आपको ? आप अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में बता सकते है।

3 thoughts on “भारत के प्रधानमंत्री (All Prime Ministers of India)

  • September 30, 2020 at 12:46 pm
    Permalink

    Aapane bahut hi jyada jankari pradan kiya.
    Jo bahut hi achhi baat hai.
    Nice, keep it up.👍
    Mere blog par visit kare kuchh naya sikhane milega 😁

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