प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पीएम फंड को लेकर इतना रहस्य क्यों

भारत में कोरोना वायरस के व्यापक संक्रमण को रोकने के लिए पहली बार लॉकडाउन शुरू होने के कुछ ही दिन बाद 27 मार्च 2020 को श्री नरेंद्र मोदी ने पीएम केयर्स फंड का गठन किया।

एक दिन के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने सभी भारतीयों से इसमें दान देने की अपील की। मोदी ने ट्वीट पर कहा, “मेरी सभी भारतीयों से अपील है कि वो पीएम केयर्स फंड में योगदान दें.” उन्होंने ये भी कहा कि उनके डोनेशन से कोरोना के ख़िलाफ़ भारत की लड़ाई और मज़बूत होगी और स्वस्थ्य भारत बनाने की दिशा में ये एक लंबा रास्ता तय करेगा।

लेकिन पीएम केयर्स फंड शुरू से ही विवादों के घेरे मे रहा है। कई लोगों ने इस पर सवाल उठाया कि जब 1948 से ही पीएम नेशनल रिलीफ़ फंड (PMNRF) मौजूद है, तो नए फंड की क्या आवश्यकता थी। तो आइए इसके कुछ पहलुओं को समझते है।

सूचना का अभाव (RTI)

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RTI Act
 

अदालतों में सूचना के अधिकार (RTI) के अंतर्गत कुछ याचिकाएँ दायर की गईं कि इस मामले में और पारदर्शिता लाई जाए। लेकिन अभी तक यही कहा गया है कि पीएम केयर्स फंड एक Public authority नहीं है। इसका मतलब ये है कि न ही सरकार की ओर से इसे पर्याप्त वित्तीय मदद मिलती है और न ही इस पर उसका नियंत्रण है। इसलिए ये RTI के दायरे में नहीं आता। इसका मतलब ये भी हुआ कि इसकी जाँच सरकारी लेखाकार (ऑडिटर्स) भी नहीं कर सकते।

प्रवासी मज़दूरों की विकट समस्या

 

जिस दिन पीएम केयर्स फंड का गठन हुआ था, उसी दिन भारत में एक बड़ा मानवीय संकट पैदा हो गया था।अचानक हुई lockdown की घोषणा से लाखों की संख्या में प्रवासी मज़दूरों ने शहरों से अपने गाँवों की ओर पलायन शुरू कर दिया। इन मज़दूरों में कई काफ़ी ग़रीब भी थे। कई दिनों तक इन मज़दूरों ने सैकड़ों मील की दूरी तय की। कुछ ने लंबी-लंबी दूरियाँ पैदल तय की. इसमें कई लोगों की जान चली गई।

ये माना गया कि सरकार इस फंड की कुछ राशि उन लोगों पर ख़र्च करेगी, जो शहर से पलायन करने को मजबूर हो गए थे, लेकिन ऐसा हुआ ही नही। इस वजह से एक विपक्षी सांसद ने तो पीएम केयर्स फंड के बारे में यहाँ तक कह दिया कि पीएम वास्तव में केयर नहीं करते।

पारदर्शिता की कमी नहीं

 

बीजेपी के प्रवक्ता नलिन कोहली ने फंड का बचाव किया। उन्होंने कहा कि PMNRF आम तौर पर प्राकृतिक आपदाओं के वक़्त इस्तेमाल किया जाता है। पीएम केयर्स फंड का गठन इसलिए किया गया ताकि इस महामारी से निपटने पर ज़्यादा ध्यान केंद्रित किया जा सके।

नलिन कोहली ने कहा कि नरेंद्र मोदी और अन्य शीर्ष मंत्री पीएम केयर्स में अपने पद के कारण शामिल हैं न कि किसी राजनीतिक पार्टी के नेता के रूप में।

बीजेपी प्रवक्ता नलिन कोहली ने कहा है कि विपक्ष के कुछ चुनिंदा लोग इस फंड को लेकर चिंता जता रहे हैं।उन्होंने कहा- ये फंड अभी नया हैं। एक ऐसे समय में जब हर कोई इस महामारी से संघर्ष करने में व्यस्त है, सार्वजनिक जवाबदेही की तत्काल आवश्यकता क्यों है?

लेकिन फंड को लेकर सवाल सिर्फ़ विपक्ष नहीं उठा रहा है, सुप्रीम कोर्ट के वकील सुरेंदर सिंह हुडा का कहना है कि सूचना देने में फंड मैनेजर्स की अनिच्छा समझ से बाहर है। हुडा ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका भी दायर की थी। उन्हें अपनी याचिका कोर्ट से वापस लेनी पड़ी क्योंकि क़ानून के मुताबिक़ पहले उन्होंने PMO से संपर्क नहीं किया था। अब उन्होंने PMO को Email किया है और अब फिर से जवाब के लिए कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।

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