क्या है ओज़ोन परत ! महत्व और ह्रास के कारण

आपने ओज़ोन के बारे में तो सुना ही होगा। क्या आप जानते हैं ओजोन परत (Ozone Layer in Hindi) हमारे लिए कितनी महत्वपूर्ण है? हम साल दर साल बढ़ते हुए तापमान से नई-नई बीमारियों से घिरते जा रहे हैं। हमारे स्वस्थ रहने के तार वायुमंडल से जुड़े हुए हैं और वही वायुमंडल अब प्रदूषण की चपेट में आ चुका है।

ओज़ोन परत का क्षरण (Ozone layer depletion) जो वर्तमान में विश्व के सभी प्रमुख देशों के सामने मुख्य समस्या के रूप में खड़ा हो चुका है। आज हम समझेंगे की ओज़ोन परत क्या हैं? ओजोन परत के ह्रास के कारण, ओजोन गैस के दुष्परिणाम और उपाय।

क्या है ओज़ोन गैस? (What is Ozone gas)

Ozone गैस काफी विषैली और हानिकारक होती है। ओजोन गैस का रंग हल्का नीला एवं गंद तीव्र होती है। ओज़ोन गैस (Ozone O3) ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से मिलकर बनने वाली गैस है। ओज़ोन गैस वायुमंडल की अन्य गैसों के मुकाबले बहुत कम मात्रा 0.02 प्रतिशत में पाई जाती है। समुद्री तट से 30 से 32 किलोमीटर ऊंचाई पर ओजोन गैस की सांद्रता अत्यधिक होती है। ओजोन गैस को दो प्रमुख भागों में बांटा जा सकता है-

अच्छी ओज़ोन (Good Ozone)

अच्छी ओज़ोन समताप मंडल (Stratosphere) में पाई जाती है। यहां यह पतली और पारदर्शी परत के रूप में उपस्थित होती है। यह वायुमंडल में उपस्थित कुल ओज़ोन गैस का 90% होती है।

बुरी ओज़ोन (Bad Ozone)

अच्छी ओजोन के अतिरिक्त बुरी ओज़ोन भी पाई जाती है। जिसका अस्तित्व क्षोभमण्डल में पाया जाता है। क्षोभमण्डल में ओजोन गैस हानिकारक प्रदूषक के रूप में कार्य करती है। बुरी ओजोन गैस मानव के द्वारा निर्मित होती है जिसका निर्माण प्रदूषण, वायु प्रदूषण, धुएँ से होता है। हालांकि इसकी मात्रा कम होती है परंतु फिर भी यह मनुष्य, जानवरों और पेड़ पौधों को हानि पहुंचाने में सक्षम होती है। 

ओज़ोन परत क्या है (What is Ozone Layer)

अच्छी ओज़ोन जो समताप मंडल में पाई जाती है वही ओजोन परत होती है। अर्थात ओज़ोन परत समताप मंडल में पाई जाती है। ओज़ोन परत पतली और पारदर्शी परत के रूप में होती है।

समताप मंडल में ओजोन परत पृथ्वी को सूर्य से निकलने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों (Ultraviolet waives) से बचाती है। ओजोन परत सूर्य से निकलने वाली खतरनाक पराबैंगनी किरणों को 95% तक रोक लेती हैं। इस प्रकार समताप मंडल और क्षोभमण्डल में उपस्थित ओजोन गैस चाहे रासायनिक रूप से समान हो। परंतु इनके कार्य अलग-अलग हैं।

ओजोन परत की खोज किसने की

ओजोन परत की खोज 1913 में फ्रांस के भौतिक शास्त्री भी चार्ल्स फेबरी और हेनरी बुसन ने की थी। शोध के दौरान इन वैज्ञानिकों ने देखा कि सूर्य से आने वाले प्रकाश स्पेक्ट्रम में कुछ काले रंग के क्षेत्र थे। परंतु 310nm से कम लेंथ का कोई भी विकिरण सूर्य से पृथ्वी तक नहीं पहुंच पा रहा था। जो किरणें पृथ्वी तक नहीं पहुंच पाई वे अल्ट्रावॉयलेट या पराबैंगनी किरणें के नाम से जानी गई। 

सूर्य से आने वाले प्रकाश स्पेक्ट्रम में जो भाग नहीं दिखाई दे रहा था वह ओज़ोन तत्व के सभी पैमानों से मेल खा गया। ये वैज्ञानिक निष्कर्ष पर पहुंचे कि समताप मंडल में ओजोन ही वह तत्व है जो सूर्य की पराबैंगनी किरणों को पृथ्वी तक आने से रोक रहा है।

ओज़ोन परत का निर्माण कैसे होता है

ओजोन परत का निर्माण सूर्य से आने वाले विकिरण की वजह से होता है। जब भी है अल्ट्रावायलेट किरणें ऑक्सीजन (O2) के अणुओं पर गिरती है तो वो ऑक्सीजन के अणुओं का तोड़ देती है। जिससे यह नवजात अणु आपस में मिलकर ओजोन (O3) का निर्माण करते हैं। इस तरह ओजोन परत का पृथ्वी के चारों तरफ एक परत का निर्माण होता है।

वायुमंडल में कई परतें होती है।जिसमें क्षोभमण्डल,  समताप मंडल, ओजोन मंडल और आयन मंडल होती है। ओजोन मंडल का विस्तार वायुमंडल में 30 से 60 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर है।

ओज़ोन परत का महत्व (Importance of ozone layer)

वायुमंडल में ओजोन परत का अत्यधिक महत्व है। जैसा कि आप जानते हैं कि सूर्य से बहुत ही हानिकारक पराबैंगनी किरणें निकलती है। यह पराबैंगनी किरणें पृथ्वी पर अनेक बीमारियों का कारण बन सकती है जिससे त्वचा रोग, कैंसर आदि प्रकार की बीमारियां हो सकती है।

इसी प्रकार इन किरणों का प्रभाव समान रूप से पेड़ पौधों और जंतुओं पर भी पड़ता है। ओजोन परत वायुमंडल में पृथ्वी पर पहुंचने से पहले ही इन पराबैंगनी किरणों को अवशोषित कर लेती है जिससे पृथ्वी पर स्थित जीव इसके सीधे प्रभाव से बच जाते हैं। इस प्रकार ओज़ोन परत का सुरक्षित रहना हमारे लिए अति आवश्यक है। ओज़ोन परत को पृथ्वी का सुरक्षा कवच भी कहा जाता है।

ओज़ोन परत का ह्रास या क्षरण (Ozone layer depletion)

मानव द्वारा की गई प्रकृति से छेड़छाड़ ओज़ोन परत की सेहत के लिए हानिकारक साबित हो रही है। कई प्रकार के विपरीत रसायन ओजोन परत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। जिससे ओज़ोन परत पतली हो सकती है या पूरी तरह समाप्त भी हो सकती है ।

जो गैसें ओज़ोन परत पर विपरीत प्रभाव डाल सकती है वो है- मोनो क्लोरोफ्लोइथेन, नाइट्रिक ऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड, ब्रोमीन, हाइड्रोसील क्लोरीन। बढ़ते औद्योगीकरण, कारखानो से निकलने वाले धुएँ और प्रदूषण, वाहनों की बढ़ती संख्या ओज़ोन परत के ह्रास के लिए उत्तरदायीं है। नाइट्रस ऑक्साइड ओजोन लेयर को पतला करने में प्रमुख है।

मनुष्य के द्वारा प्रयोग में लाई जा रही वस्तुएं जैसे एयर कंडीशनर (AC), रेफ्रिजरेटर, प्लास्टिक आदि क्लोरोफ्लोरोकार्बन गैस का उपयोग करती हैं जो ओज़ोन परत (Ozone layer) के लिए बहुत हानिकारक है।

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ओज़ोन परत में छेद (Ozone hole)

उपरोक्त कारणों से बताई गई गैसें समताप मंडल में पहुंचने में कामयाब हो गई है जिसकी वजह से ओज़ोन परत का ह्रास (Ozone layer depletion) होता है। ब्रोमीन एवं क्लोरीन का एक परमाणु ही ओज़ोन के 1 लाख परमाणुओं को नष्ट करने में सक्षम है। 

इन दुष्प्रभावों की वजह से पृथ्वी के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों को काफी नुकसान पहुंचा है जिसकी वजह से ओज़ोन परत में छेद हो गए हैं। इन्हीं छिद्रो को ओज़ोन होल (Ozone Hole) कहा जाता है। 

ओज़ोन होल के बारे में सर्वप्रथम 1956 में जानकारी मिली थी। 1985 में वैज्ञानिकों को यह भी पता चला कि अंटार्टिका महाद्वीप के ऊपर ओजोन परत में एक बड़ा छेद हो गया है जो लगातार बढ़ रहा है। ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड जैसे देशों के ऊपर भी वायुमंडल में ओजोन परत में छिद्र देखे गए हैं।

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ओज़ोन प्रदूषण (Ozone Pollution)

वैज्ञानिकों के मत के अनुसार 8 घंटे के औसतन समय में ओज़ोन प्रदूषण की सामान्य मात्रा 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। 2019 के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली के अधिकतर इलाकों में 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से ज्यादा ओजोन प्रदूषण मापा गया है। वर्ष 2018 में दिल्ली में ओजोन परत की मात्रा 106 माइक्रोग्राम और 2019 में 122 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर मापी गई है।

ओज़ोन प्रदूषण के दुष्प्रभाव

ओज़ोन प्रदूषण पृथ्वी पर मौजूद हर प्रकार के जीव-जंतु और पेड़-पौधों पर विपरीत प्रभाव डालता है। ओज़ोन प्रदूषण की वजह से निम्न हानिकारक प्रभाव पड़ते हैं।

मनुष्य के ऊपर

  • मनुष्य में त्वचा के कैंसर होने की आशंका।
  • जंतुओं और मनुष्य की डीएनए संरचना में बदलाव हो सकता है।
  • गर्भस्थ शिशुओं के लिए हानिकारक हो सकता है।
  • आंख संबंधित रोग जैसे आंखों की जलन “स्नो ब्लाइंड” भी हो सकता है।
  • मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता का कम होना। संक्रामक रोग होने का खतरा, फेफड़ों पर असर, श्वास रोग व हृदय रोग में घातक साबित हो सकता है।

 

वनस्पतियों के ऊपर असर

पेड़-पौधों की प्रकाश संश्लेषण क्रिया पर विपरीत असर हो सकता है। पत्तियों का छोटा होना और अंकुरण की समय अवधि में इजाफा होना और फसलों के उत्पादन में गिरावट आना।

ओज़ोन प्रदूषण के भारत पर दुष्प्रभाव

विश्व के अन्य कई देशों के साथ भारत के ऊपर भी ओज़ोन प्रदूषण के विपरीत प्रभाव पड़े हैं। भारत के अब तक ओज़ोन परत के क्षरण से होने वाले दुष्प्रभावों की वजह से 1.2 करोड़ लोगों ने जान गंवाई है। इसी के चलते भारत ओज़ोन प्रदूषण से होने वाली मौतों के मामले में विश्व में तीसरे स्थान पर है। समय से पूर्व होने वाली मौतों के मामले में भी भारत चीन से भी आगे हैं।

भारत में ओज़ोन परत को लेकर उठाए गए कदम 

भारत ने अपनी जिम्मेदारी समझते हुए समय-समय पर ओज़ोन प्रदूषण से बचाने के लिए कदम उठाए हैं। भारत ने 2010 से चरणबद्ध तरीके से क्लोरोफ्लोरोकार्बन का उत्पादन एवं प्रयोग बंद कर दिया है। 2010 से ही सीटीसी का उत्पादन और उपयोग बंद कर दिया गया है।

13 अक्टूबर 2016 को हाइड्रो क्लोरो फ्लोरो कार्बन बनाने वाली कंपनियों को कड़े निर्देश जारी किये गए हैं। भारत ने नेशनल कूलिंग एक्शन प्लान बनाया है। इसका  मुख्य उद्देश्य रेफ्रिजेट ट्रांजिशन और ऊर्जा दक्षता में सुधार रखा गया है।

ओज़ोन परत को ह्रास से बचाने के उपाय

ओज़ोन परत को ह्रास (ozone layer depletion) से बचाने के लिए निम्न उपाय किए जा सकते हैं-

वाहनों का कम उपयोग-  हमें अपनी जरूरत के हिसाब से ही वाहनों का प्रयोग करना चाहिए। वाहनों से निकलने वाला धुआं ओजोन परत के लिए काफी घातक होता है।

कीटनाशकों का सीमित उपयोग-  अगर कीटनाशकों की जगह प्राकृतिक उर्वरकों का अपनाया जाए तो बेहतर परिणाम मिलेंगे।  

वृक्षारोपण-  हम सब जानते हैं कि वृक्ष प्रकृति के सबसे बड़े साथी होते हैं। इसलिए हमें वृक्षों की कटाई पर रोक लगाने की आवश्यकता है। साथ ही हमें अधिक से अधिक वृक्षारोपण भी करना चाहिए। 

एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर का सीमित उपयोग-  एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर में काम आने वाली गैस ozone layer के लिए हानिकारक होती है। इसलिए हमें इन्हें अपनी आवश्यकता के अनुरूप ही प्रयोग करना चाहिए।

ओज़ोन दिवस कब मनाया जाता है (World Ozone day)

ओज़ोन परत के प्रति विश्व जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से एवं इसके महत्व को समझने के लिए संयुक्त राष्ट्र की सामान्य सभा ने प्रतिवर्ष 16 सितंबर को ओज़ोन दिवस बनाने का फैसला किया। यह फैसला 19 दिसंबर 2000 को लिया गया था। इस प्रकार 16 सितंबर को पूरे विश्व में विश्व ओज़ोन दिवस मनाया जाता है। विश्व ओज़ोन दिवस मनाने का मुख्य कारण पृथ्वी को ओजोन गैस के दुष्परिणामों से बचाने एवं इसके लिए उपाय करने से है।

लॉकडाउन से ओज़ोन परत में सुधार

विश्व भर में कोरोना महामारी के प्रकोप के चलते हुए कई देशों ने लॉक डाउन लगाया जिसकी वजह से प्रदूषण की मात्रा में भारी गिरावट देखी गई फलस्वरूप ओज़ोन परत की सेहत में भी सुधार देखा गया है। वायुमंडल में अंटार्टिका के ऊपर जो छेद ओज़ोन परत में हो गया था उसमें बहुत सुधार देखा गया है।

निष्कर्ष

वैसे लॉक डाउन की वजह से ओज़ोन परत के छिद्र (Ozone layer depletion) में सुधार हुआ हो परंतु सभी देशों को आगे महत्वपूर्ण कदम उठाने होंगे जिससे ओज़ोन परत की सेहत बनी रहे। विश्व के कई देशों ने ओजोन परत के संबंध में बहुत अच्छा कार्य किया है। भारत को भी ओज़ोन परत से संबंधित ओर पुख्ता उपाय करने होंगे जिससे ओज़ोन परत (Ozone layer in Hindi) के ह्रास से होने वाले घातक प्रभावों और बीमारियों से बचा जा सके।

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