भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा और इतिहास

भारत का राष्ट्रीय ध्वज यानी भारतीय तिरंगा हमारे देश की पहचान है। इस भारतीय तिरंगे को स्वतंत्र भारत में फ़हराने एवं इसकी गरिमा बनाए रखने के लिए कई शूरवीरों ने अपनी जान की बाजी लगाई है। भारत का तिरंगा भारतीयों की शान है। तिरंगा भारतीय राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक भी माना जाता है। आज हम जानेंगे की भारतीय राष्ट्रीय झंडे (तिरंगा) के पीछे क्या इतिहास रहा है? 

भारत का पहला राष्ट्रीय ध्वज- 1906

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1906 Indian Flag
 

वैसे अंग्रेजी सरकार ने भारत को अपना पहला ध्वज 1857 में दिया था जो ब्रिटिश ध्वज के समान था। परंतु भारतीयों द्वारा अपना प्रथम राष्ट्रीय ध्वज 7 अगस्त 1906 को पारसी बागान स्क्वायर चौक (ग्रीन पार्क) कोलकाता में फहराया गया था। 

भारत के प्रथम झंडे का डिजाइन स्वतंत्रता सेनानी सचिंद्र प्रसाद बोस और हेमचंद्र कानूनगो द्वारा तैयार किया गया था। इस राष्ट्रीय ध्वज में तीन रंग की क्षेतिज पट्टियां रखी गई थी। प्रथम पट्टी हरे रंग की थी जो सबसे ऊपर थी। बीच में पीले रंग की पट्टी रखी गई थी एवं सबसे नीचे लाल रंग की पट्टी थी। इस ध्वज की हरी पट्टी पर आठ आधे खिले कमल के फूल विद्यमान थे जबकि पीली पट्टी पर वंदे मातरम लिखा हुआ था। लाल पट्टी पर सूर्य एवं  अर्ध चंद्रमा का प्रतीक छपा हुआ था। यह ध्वज राष्ट्र वादियों में उत्साह पैदा करने में विफल रहा। 

1907 का द्वितीय ध्वज 

1907 Indian Flag
 

भारत का दूसरा ध्वज सन 1907 में पेरिस में मैडम कामा और उनके साथ कुछ निर्वासित किए गए क्रांतिकारियों द्वारा फहराया गया था। मैडम कामा का पूरा नाम बीकाजी रुस्तम कामा था। ये झंडा विदेशी जमीन पर फहराया जाने वाला पहला भारतीय झंडा था।  द्वितीय झंडा प्रथम झंडे की आकृति के समान ही था परंतु इसमें ऊपरी पट्टी में कमल के फूल की जगह सप्त ऋषि अंकित थे एवं इसके रंगो में भी फेरबदल किया गया। यह ध्वज जर्मनी की राजधानी बर्लिन में भी समाजवादी सम्मेलन के दौरान फहराया गया था। 

1917 का तीसरा ध्वज

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1917 Indian Flag
 

जब भारत में राजनीतिक एवं स्वतंत्रता संघर्ष एक नए मोड़ पर था उस समय 1917 में डॉ. एनी बेसेंट एवं लोकमान्य तिलक द्वारा भारत का तीसरा झंडा फहराया गया। इस समय इन दोनों द्वारा होमरूल आंदोलन चलाया जा रहा था। इस ध्वज में पांच लाल एवं चार हरी पट्टियां क्षेतिज अवस्था में थी। इसके बीच में सप्त ऋषि के सात सितारे थे जबकि एक कोने में चांद एवं तारा था। झंडे के बायीं ओर ऊपर की तरफ एक यूनियन जैक बना हुआ था। 

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1921 का चौथा ध्वज

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1921 Indian Flag 
 

इस समय तक भारतीय राजनीति में महात्मा गांधी जी सक्रिय हो चुके थे। 1921 में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी का सत्र बेजवाड़ा में चल रहा था। बेजवाड़ा जो की अब विजयवाड़ा के नाम से जाना जाता है। इस दौरान आंध्र प्रदेश के ही एक युवक ने झंडा बनाकर गांधी जी को दिया था। 

इस ध्वज में दो प्रमुख रंग थे लाल और हरा। यहां लाल रंग हिंदू धर्म का एवं हरा रंग मुस्लिम धर्म का प्रतिनिधित्व कर रहा था। इस झंडे में अन्य सभी धर्मों के प्रतिनिधित्व का अभाव था। इस हेतु महात्मा गांधी जी ने सुझाव दिया कि बाकी बचे समुदायों का प्रतिनिधित्व दर्शाने के लिए इसमें सफेद रंग और जोड़ा जाना चाहिए। गाँधी जी की सलाह पर ही इसमें राष्ट्र की प्रगति को दर्शाता हुआ चलता चरखा भी इस इस झंडे में जोड़ा गया था। 

1931 का पांचवा ध्वज

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1931 Indian Flag
 

झंडे को सांप्रदायिकता से जोड़ देना लोगों को रास नहीं आ रहा था। 1931 के दौरान मोतीलाल नेहरू एवं उनके सहयोगियों ने स्वराज ध्वज को राष्ट्रीय एकता के प्रतीक के रूप में स्थापित किया। आखिरकार कराची 1931 में एक ऐसे ध्वज को अपनाया गया जो किसी संप्रदाय विशेष का प्रतिनिधित्व नहीं करता। 

1931 में वर्तमान तिरंगे का पुराना स्वरूप अपनाया गया था। इसमें लाल रंग को हटाकर केसरिया कर दिया गया एवं रंगो का क्रम भी बदल दिया गया। इस ध्वज में तीन रंग थे ऊपर केसरिया बीच में सफेद एवं बीच में हरा रंग। झंडे के बीच में गांधीजी का चलता हुआ चरखा रखा गया था। इस झंडे को डिजाइन पिंगली वेंकैया जी ने किया था। यह ध्वज भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रतीक था जिसे संपूर्ण भारत के झंडे के रूप में इस्तेमाल किया गया। 

वर्तमान तिरंगा 1947

आखिरकार कई वर्षों के बाद एवं कई चरणों से गुजरते हुए राष्ट्रीय ध्वज को 1947 में अंतिम रूप दिया गया। 1947 में जब राष्ट्रीय कांग्रेस अपने ध्वज को राष्ट्रीय ध्वज बनाने का प्रयास कर रही थी तब सुरय्या तैय्यब जी ने जो हैदराबाद के बदरुद्दीन तैयब जी की पत्नी थी, कुछ सुझाव दिए। बदरुद्दीन तैयब जी प्रधानमंत्री ऑफिस में एक ऑफिसर थे। सुरय्या जी ने गांधी जी के चरखे के स्थान पर अशोक चक्र लगाने की सिफारिश की। आखिरकार 22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने इसे राष्ट्रीय कांग्रेस के ध्वज के रूप में अपनाया जो स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात भारत का राष्ट्रीय झंडा भी बना।

भारत की आजादी उपरांत एक राष्ट्रीय  झंडा समिति का गठन हुआ जिसमे डॉ. राजेंद्र प्रसाद को अध्यक्ष नियुक्त किया गया। इस समिति की के द्वारा ही सुरय्या जी और बदरुद्दीन तैयब जी की सलाह पर चरखे को अशोक चक्र से  बदल दिया।   

इसमें तीन रंग मौजूद थे जिनमे केसरिया, सफेद एवं हरा रंग था। इस ध्वज में सिर्फ चरखे के स्थान पर सम्राट अशोक का धर्म चक्र जोड़ दिया गया जो नीले रंग का था।  

तिरंगे के रंग एवं उनका मतलब

तिरंगे के प्रत्येक रंग का कुछ न कुछ मतलब है। राष्ट्रीय ध्वज का सबसे ऊपरी रंग केसरिया शक्ति एवं साहस का प्रतीक है। सफेद पट्टी जो झंडे के बीच में स्थित है शांति एवं सत्य का प्रतीक है। अंतिम पट्टी उर्वरता वृद्धि एवं भूमि की पवित्रता का द्योतक है। 

अशोक चक्र तिरंगे के सफेद रंग में उपस्थित है। अशोक चक्र को धर्म चक्र भी कहा जाता है। अशोक चक्र तीसरी शताब्दी में ईसा पूर्व मौर्य वंश के शासक सम्राट अशोक के बनाए गए सारनाथ मंदिर से लिया गया है। इस अशोक चक्र में कुल 24 तिल्लिया है। अशोक चक्र न्याय का प्रतीक भी माना जाता है। 24 तिल्लियां जीवन की अनवरत गति एवं प्रगति का प्रतीक है। 

तिरंगे के बारे कुछ रोचक तथ्य

  • दोस्तों 26 जनवरी 2002 को भारतीय ध्वज संहिता लागू की गई जिसमें झंडा फहराने के संबंधित नियम है। भारतीय ध्वज संहिता कानून से पहले ध्वज संहिता- भारत कानून लागू था। 
  • आम नागरिको को अपने घरों या दफ्तरों में सामान्य दिनों में भी तिरंगा फहराने की अनुमति 22 दिसम्बर 2002 के बाद मिली थी। 
  • 2009 से पहले तिरंगे को रात में फ़हराये जाने की अनुमति नहीं थी परंतु 2009 के बाद कुछ शर्तों के साथ तिरंगा रात में भी फहराया जा सकता है। इन शर्तों में शामिल था कि तिरंगा एक लंबे डंडे या पाइप पर होना चाहिए और रात के अंधेरे में चमकदार होना चाहिए। 
  • भारत के राष्ट्रीय ध्वज की चौड़ाई-लंबाई का अनुपात  2:3 है।
  • ऐसा भी कहा जाता है कि जब तिरंगे से चरखे को निकालकर अशोक चक्र लगाया गया था तब गांधी जी नाराज हो गए थे।
  • झंडा फहराना एक मूल अधिकार माना गया है। 23 जनवरी, 2004 को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने यूनियन ऑफ इंडिया बनाम नवीन जिंदल मामले के अनुसार अनुच्छेद -19 (1)(a) के तहत सम्मान एवं गरिमा के साथ ध्वज फहराना एक मूल अधिकार है।     

निष्कर्ष

भारतीय देश का राष्ट्रीय तिरंगा अपने आप में एक गौरवपूर्ण इतिहास रखता है। लगभग 90 वर्ष एवं छह से सात चरणों से गुजर कर भारतीय तिरंगा अपने अस्तित्व में आया था। किसी भी देश का ध्वज उस देश का प्रतीक माना जाता है। उसी प्रकार भारत का प्रतीक एवं गौरव है तिरंगा। “विजयी विश्व तिरंगा प्यारा झंडा ऊंचा रहे हमारा”

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धन्यवाद।

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